शाबर मंत्र साधना shabar mantra

Shabar mantra :- मंत्र तीन प्रकार के होते हैं – वैदिक, पौराणिक और तांत्रिक।

Dr.R.B.Dhawan (editor – Aap ka bhavishya.in), Astrological consultant, shukracharya

विद्वानों की धारणा है कि कलियुग में तांत्रिक मंत्र सफल होते हैं, कलियुग के लिये तांत्रिक मंत्र ही शक्तिशाली हैं। तांत्रिक मंत्र भी तीन प्रकार के होते हैं – शाबर मंत्र, Shabar mantra डामर मंत्र और बीजाक्षर मंत्र। इन तीनों प्रकार के तांत्रिक मंत्रों का अपना-अपना विज्ञान है। जो लोग उसके वैज्ञानिक रहस्य को समझते हैं, वे ही मंत्रों का प्रयोग कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। शास्त्रों में हमें स्थान-स्थान पर शाबर मंत्रों के विषय में वर्णन मिलता है। यह एक प्रकार के तांत्रिक उपाय ही होते हैं, Dr.R.B.Dhawan, shukracharya के अनुसार इन की साधना करना थोड़ा जटिल कार्य होता है, परन्तु यदि सही ढंग से इन्हें सिद्ध कर लिया जाये तो लाभ भी अवश्य ही मिलता है। यहाँ मैं आपको कुछ शाबर मंत्रों के बारे में बताने जा रहा हूँ :-

1. दरिद्रता दूर करने के लिये धनदा मंत्र:- गरीबी और अभावों से मुक्ति के लिये धनदा मंत्र अत्यंत प्रभावकारी है।

मंत्र:- नमः विष्णवे सुरपतये महाबलाय स्वाहा।।

2. पदोन्नति के लिये भद्रकाली मंत्रः- भद्रकाली यंत्र को महाकाली यंत्र भी कहा जाता है। इसे स्वर्ण पर अंकित करायें। पैंतालिस दिनों तक प्रति दिन एक हजार बार मंत्र का जाप करें।
त्रयाणां देवानां त्रिगुण जनितानां तव शिवं मवेत् पूजा, पूजा तव चरणयोर्या विराचेता। महानिशा में शाबर मंत्रों की साधना- शाबर मंत्र किसी वेद, शास्त्र पुराण या अन्य ग्रन्थ में एक जगह संकलित नहीं मिलता। ये मंत्र लोक भाषा में प्रचलित हैं तो अपने से स्वयं सिद्ध हैं। यह तो साधक पर निर्भर करता है, कि वह मंत्रों का कब और कैसे प्रयोग करें।

3. रक्षा कवच मंत्र:- साधक हो या सामान्य व्यक्ति हर किसी को सर्वप्रथम अपनी रक्षा करनी चाहिये। हो सकता है आपके ऊपर ही कोई दूसरा तांत्रिक प्रयोग कर दे तो आप दूसरों की रक्षा करने से पहले ही स्वयं कष्ट में पड़ जायेंगे। ऐसी स्थिति में सर्वप्रथम अपनी रक्षा और बचाव करना चाहिये :-

मंत्र:- ॐ नमो आदेश गुरून को ईश्वरी वाचा, अजरी बजरी बाड़ा बजरी मैं बांधा दसो दुवार छवा और के घालो तो पलट हनुमंत वीर उसी को मारे पहली चैकी गनपती, दूजी चैकी हनुमंत, तीजो चैकी से भैरों चैथी, देह रक्षा करन को आवे श्री नरसिंह देवजी, शब्द सांचा पिंड सांचा चले मंत्र ईश्वरी वाचा।।

उक्त मंत्र शारीरिक पीड़ा से छटपटाते व्यक्ति पर भी प्रयोग किया जा सकता है। यदि किसी को भी मूर्छा आ जाये और कष्ट से घिर जाये तो इस मंत्र से झाड़ देने से वह व्यक्ति अच्छा हो जाता है, और शीघ्र स्वस्थ प्रसन्न जो जाता है। उक्त शाबर मंत्र Shabar mantra का प्रयोग किसी उपद्रव ग्रासित घर को शुद्ध करने में भी किया जाता है।

4. शत्रु एवं प्रतिद्वंदी को परास्त करने के लिये:- यह मंत्र अपने शत्रु या प्रतिद्वंदी को परास्त करने के लिये प्रयोग में लाया जाता है। महानिशा में इसे 108 बार पढ़कर हवन करके सिद्ध कर लिया जाता है। फिर जब चाहें अपने लिये प्रयोग करें। दूसरों के लिये इसका प्रयोग गंडा या ताबीज के रूप में किया जाता है –

मंत्र:- हाथ बसे हनुमान भैरों बसे लिलार, जो हनुमंत को टीका करे मोरे जग संसार। जो आवे छाती पांव धरे बजरंग बीर रक्षा करें, महम्मदा वीर छाती टोर जुगुनियाँ, बीर शिर फोर उगुनिया बीर मार-मार भास्वत करे भैरों बीर की आन फिरती रहे बजरंग बीर रक्षा करे, जो हमरे ऊपर घाव छाले तो पलट हनुमान बीर उसी को मारे जल बाँधे थल बाँधे आर्या आसमान बाँधे कुदवा और कलवा बांधे चक चक्की आसमान बाँधे वाचा साहिब साहिब के पूत धर्म के नाती आसरा तुम्हारा है।

5. सुख पूर्वक प्रसव का मंत्र:– इस मंत्र को 108 बार हवन करके सिद्ध कर लेने पर जब प्रयोग करना हो तब 11 बार पढ़कर जल अभिमंत्रित करके गार्भिणी को पिला दें। तुरंत सुख पूर्ण प्रसव हो जायेगा।

मंत्र:- ॐ मुक्ताः पाशा विमुक्ताः मुक्ताः सुर्येणरश्मयः। मुक्ताः सर्वभयापूर्व ऐहि माचिर-माचिर स्वाहा।।

6. चिंतित कार्य की सफलता के लिये:- जब किसी कार्य के होने न होने की चिंता बनी हो अथवा शत्रु भय या राज भय हो अथवा कोई कामना जो पूर्ण न हो रही हो तो निम्न मंत्र की एक माला नित्य जप लें। कुछ दिनों में ही चिंता समाप्त हो जायेगी और मंत्र सिद्ध हो जायेगा।

मंत्र:- ॐ हर त्रिपुर भवानी बाला, राजा प्रजा मोहिनी सर्व शत्रु। विध्यवासिनी मम चिंतित फलं, देहि-देहि भुवनेश्वरी स्वाहा।।

7. रोग हरण के लिये:- निम्न मंत्र की 21 माला महानिशा (काली रात) में जपकर सिद्ध कर लें। फिर जब कोई बीमार हो तब किसी बर्तन में शुद्ध जल लेकर इसे 21 बार पढ़कर जल को फूँककर मंत्रित करके रोगी को पिला दें। रोगी पहले से, ठीक होने लगेगा। रोग एवं रोगी की स्थिति के अनुसार इस तरह का अभिमंत्रित जल 3, 5, 7, 11, 21 दिन तक देना चाहिये।

मंत्र:- ॐ सं सां सिं सीं सुं सूं सें सैं सों सौं सं सः वं वां विं वीं वुं वूं वें वैं वों वौं वं वः सह अमृत वरचे स्वाहा।

शाबर मंत्र की विश्वश्नीयता पर कभी भी शक नहीं किया जा सकता है। परन्तु इनकी सिद्ध के लिये साधना का ढंग एकदम सही व सटीक होना चाहिये। (Top best astrologer in Delhi), marriage and after marriage problems salutations.

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Diwali muhurat 2017

2015 Diwali Muhurat

Diwali Pooja muhurat 2017

by :-​Dr.R.B.Dhawan

diwali 2017 का पर्व 19 अक्टूबर 2017 बृहस्पिवार के दिन है। कार्तिक मास की अमावस्या की रात्रि प्रदोषकाल, स्थिर लग्न में अथवा  महानिशीथ काल, स्थिर लग्न में अनुकूल चौघडिया के समय गणेश सहित देवी महालक्ष्मी-महाकाली-महासरस्वती diwali Pooja की पूजा-आराधना Laxmi pooja करने से यह देवीयां भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करती हैं।

इस वर्ष दीपावली depawli pooja, Laxmi Pooja का पर्व 19 अक्तूबर 2017 बृहस्पतिवार के दिन होगा। दिल्ली की समय गणना अनुसार इस दिन अमावस्या रात्रि 24:44 तक रहेगी, चित्रा नक्षत्र 19:28 से आरंभ होगा, वृष (स्थिर लग्न) 19:11 से 21:06 तक रहेगी। निशीथ काल nishith kaal 20:20 से 22:54 तक, प्रदोष काल pradosh kaal 17:46 से 20:20 तक रहेगा। दीपावली की शाम प्रदोष काल में स्नान के उपरांत वस्त्राभूषण धारण करके धर्मस्थल पर श्रद्धापूर्वक दीपदान करके शुभ मुहूर्त अनुकूल चौघडिया में अपने निवास स्थान पर श्री गणेश सहित देवी महालक्ष्मी महाकाली महासरस्वती और कुबेर की पूजा diwali pooja करनी चाहिए।

महालक्ष्मी Laxmi Pooja पूजन विशेष मुहूर्त diwali muhurat 2017, :-   (1). सायं 19 : 11 से 20 : 20 तक। (2). रात्रि 20 : 20 से 20 : 59 तक। यह दोनों मुहूर्त वृष लग्न के हैं।

Diwali Special muhurt 2017, मध्य रात्रि महानिशीथ काल सिंह लग्न : 25 : 39 से 25 : 48 तक है।

Diwali muhurat by:- Dr.R.B.Dhawan, Top astrologer in Delhi, Best astrologer in India 


Diwali Pooja Muhurat 2016

diwali pooja muhurat 2016

Diwali Pooja Muhurat 2016

30 अक्तूबर 2016 दीपावली पर्व है। दीपावली की रात्रि प्रदोषकाल में महालक्ष्मी पूजन (Diwali Pooja Muhurat 2016) की परम्परा आदिकाल से चली आ रही है। इस दिन सूर्य व चन्द्रमा तुला (शुक्र की राशि) में विचरण कर रहे होते हैं।

कार्तिक अमावस्या की रात्रि स्थिर लग्न (वृष या सिंह) में महानिशीथ काल में महालक्ष्मी का पूजन करने से माता लक्ष्मी साधक के घर स्थाई निवास करती हैं।

इस वर्ष महालक्ष्मी पूजन MahaLaxmi Diwali Pooja Muhurat 2016 का शुभ तथा विशेष मुहूर्त सॉय 18:28 से आरम्भ होकर 20:22 तक रहेगा।

इस दिन सॉय 18:28 से 20:22 तक के समय में अमावस्या तिथि अंतर्गत वृष लग्न तथा शुभ, अमृत तथा चर का चौघडिया का शुभ योग बना है।

स्थिर लग्न के मुहूर्त में महालक्ष्मी पूजन करने से धन-धान्य स्थिर रहता है। इस मुहूर्त में दीपदान, गणपति सहित महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, बही-खाता पूजन तथा धर्मस्थलों में और अपने घर में दीप प्रज्जवलित करना चाहिये।

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दीपावली पूजन तथा इस रात्रि में की जाने वाली विशेष साधनाओं का विस्तार पूर्वक विवरण जानने के लिये देखें गुरूजी द्वारा प्रकाशित अॉनलाईन ज्योतिषीय मासिक पत्रिका aapkabhavishya यह पत्रिका www.shukracharya.com पर नि:शुल्क उपलब्ध है।

इस के अतिरिक्त AapKaBhavishya.in पर भी गुरूजी (डा. आर.बी.धवन) के ज्योतिषीय लेख भी आप पढ़ सकते हैं।

Santaan Prapti Upaya for Diwali – इस दीपावली करें संतान प्राप्ति उपाय

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Santaan Prapti Upaya संतान प्राप्ति उपाय (एक दिवसीय दीपावली साधना प्रयोग)

कुण्डली में संतानोत्पत्ति योग न हो अथवा अनेक बार गर्भ हानि होती रही हो या संतान दीघार्यु नहीं होती हो तो उसके लिए यह संतान प्राप्ति उपाय Santaan Prapti Upaya महत्वपूर्ण है। इस साधना प्रयोग को दीपावली की रात्रि में संतान की इच्छा करने वाली महिला के संपन्न करने से संतान का योग प्रबल होकर एक वर्ष में संतानोत्पत्ति अवश्य होती है। और वह संतान आज्ञाकारी होती है। इस प्रकार के प्रयोग से गृहस्थ जीवन अनुकूल एवं सुखदायी बन जाता है।

संतान प्राप्ति उपाय Santaan Prapti Upaya के लिए साधिका को चाहिए कि वह दीपावली की रात्रि में स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण कर पूर्व की तरफ मुख कर के पीले आसन पर बैठ जाएं सामने लकड़ी की चौकी पर एक थाली में चावल से त्रिकोण बनाकर उसके मध्य में मोती पर बने अभिमंत्रित मुक्ता गणपति की स्थापना करें और फिर पंचोपचार (फूल, चावल, रोली, कलावा तथा धूप-दीप) से पूजा करके पुत्रजीवा की 108 दानों वाली माला से 51 माला अग्रलिखित मंत्र जप पूर्ण करें।

यही प्रयोग प्रत्येक माह शुक्ल पंचमी के दिन गर्भवती होने तक पुत्र की इच्छा रखने वाली महिला को दोहराना चाहिये। निश्चय ही उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यही संतान प्राप्ति उपाय Santaan Prapti Upaya उस महिला का पति या घर का कोई अन्य सदस्य भी कर सकता है, परंतु उसको उस महिला के नाम का संकल्प अवष्य लेना होगा। यदि कोई साधक-साधिका किसी दूसरे के लिए प्रयोग करना चाहे तो संकल्प ले लें कि ‘मैं यह प्रयोग अमुक व्यक्ति के लिए संपन्न कर रहा/रही हूँ।

मंत्र- ऊँ नमो नारायणाय पुत्र सन्तानं देही देहि ठः ठः स्वाहा।

जप पूर्ण होने पर गणपति जी को मिष्ठान का भोग लगवाकर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें। वह माला जल में विसर्जित कर दें। मुक्ता गणपति का चांदी में लॉकेट बनवाकर महिला को गले में धारण करना चाहिये।

साधना सामग्री– अभिमंत्रित मुक्ता गणपति (मोती पर बने गणपति), 108 दाने की पुत्रजीवा माला।

न्यौछावर राशि रू. 3100

संपर्क : Sukracharya, F-265, Street No. 22, Laxmi Nagar, Delhi-110092, Mob: 09810143516

2015 Diwali Muhurat ~ दीपावली के दिन महालक्ष्मी पूजन कब करें

2015 Diwali Muhurat

दीपावली के दिन महालक्ष्मी पूजन कब करें?[Diwali Muhurat 2015]

2015 Diwali Muhurat
2015 Diwali Muhurat

इस वर्ष दीपावली(Diwali) 11 नवम्बर 2015 बुधवार है, इस दिन महालक्ष्मी का पूजन केवल स्थिर लग्न में ही सम्पन्न किया जाना चाहिये, क्योंकि हरएक मनुष्य की यही इच्छा होती है कि, लक्ष्मी को स्थिर रखना है। इस वर्ष अमावस्या की रात्रि को वृष और सिंह मात्र दो ही स्थिर लग्न आते हैं, अतः इन लग्न-मुहूर्त में ही लक्ष्मी पूजन सम्पन्न होना चाहिये।

दिल्ली के लिये
वृष लग्न दीपावली(diwali) के दिन सांयकाल 17 बज कर 42 मिनट से 19 बज कर 35 मिनट तक है, तथा सिंह लग्न मध्य रात्रि को 00 बज कर 12 मिनट से 02 बज कर 28 मिनट तक है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इन दोनो लग्नों का यह समय दिल्ली प्रदेश के लिये है। अतः इस वर्ष दीपावली कि निशा रात्रि में एश्वर्यवाली जीवन, सफलता व उन्नति, सुख-समृद्धि के लिये शुभ दूसरा कोई मुहुर्त(muhurat) नहीं है। इस दुर्लभ तथा सिद्ध मुहूर्त में मां लक्ष्मी की पूजा करके कोई भी साधक दुर्लभ देवी शक्तियों का आशिर्वाद प्राप्त कर सकता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस इस वर्ष(2015) वृष एवं सिंह लग्न के महालक्ष्मी पूजा मुहूर्त(Diwali Muhurat) की विशेषता यह है कि इस समय में वातावरण में अलौकिक सकारात्मक तथा समृद्धि प्रदान करने वाली ऊर्जा बहुतायत मात्रा में उपस्थित होगी। जिस समय में महालक्ष्मी की पूजा करके कोई भी मनुष्य सर्व भौतिक सुखों का साक्षात्कार कर सकता है। यह यह रहस्य हरकोई नहीं जानता। गुरू जी ने इस वर्ष महालक्ष्मी पूजा के लिये इसी विषेष महूर्त की गणना की है, इसी मुहूर्त में गुरूजी समृद्धि प्रदान करने वाले अनेक यंत्रों का निर्माण और अनेक यंत्रों की प्राण-प्रतिष्ठा भी करने का निश्चय किया है।

श्रीयंत्र की साधना | Shri Yantra for Money

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श्रीयंत्र की साधना (Shri Yantra for Money)

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मानव जीवन का संचालन धन के बिना संभव नहीं हैं, मनुष्य को अपनी आवश्यकता पूर्ति हेतु पग-पग पर धन की आवश्यकता पड़ती हैं दरिद्रता को सबसे बड़ा अभिशाप माना गया है। यदि धन न हो तो जीवन नरक तुल्य बन जाता है। ऐसे व्यक्ति को भाई-बंधु, मित्रा, रिश्तेदार सब छोड़ देते हैं। व्यक्ति को कितना धन मिलेगा, वह कैसा जीवन जियेगा यह सब उसके पूर्व जन्म कर्मानुसार माँ के गर्भ में ही तय हो जाता है-
आयु कर्म वित च विद्या निधनमेव च।
प चैतानि सृजयन्ते गर्भस्थयैव देहिनः।।

पूर्वजन्मदुष्कर्मानुसार ही व्यक्ति की कुंडली में केमद्रुम, हृद योग, काक योग, दरिद्र योग, हुताशन योग, रेका योग, शकट योग, ऋण योग, मृति योग, दुर्याेग, निर्भाग्य योग, निःस्व योग एवं ऋण ग्रस्त योग आदि अशुभ योग आते हैं। ये योग व्यक्ति के जीवन को धन एवं ऐश्वर्यहीन बनाते हैं। इन कुयोगों को दूर करने हेतु हमें जप, पूजा, अनुष्ठान एवं यंत्र-मंत्र-तंत्रादि का सहारा लेना पड़ता हैं। इन कुयोगों को दूर कर व्यक्ति को धन एवेश्वर्य देने वाले यंत्र राज श्री यंत्र(shri yantra) की महत्ता प्रस्तुत हैं। यंत्र मंत्र मय हैं जिस प्रकार आत्मा और शरीर में भेद नहीं होता उसी प्रकार यंत्र एवं देवता में कोई भेद नहीं होता है। यंत्रादेवता का निवास स्थान माना गया है-
यन्त्रमन्त्रमयं प्रोक्तं मंत्रात्मा देवतैवहि। देहात्मनोर्यथा भेदो यन्त्र देवयोस्तथा।

यंत्र और मंत्र मिलकर शीघ्र फलदायी होते हैं। मंत्रों में शक्ति शब्दों में निहित होती है, वहीं यह शक्ति यंत्रों के रेखा एवं बिन्दुओं में रहती है। श्री यंत्र में लक्ष्मी का निवास रहता है। इस यंत्र की रचना के बारे में कहा गया है-
बिंदुत्रिकोण वसुकोण दशारयुग्म, मन्वस्व नागदल षोडसपंचयुक्तम्।
वृत्तत्रायं च धरणी सदनत्रायं च, श्री चक्रमेतदुदितं परदेवतायाः।।

अर्थात् श्री यंत्र बिंदु, त्रिकोण, वसुकोण, दशारयुग्म, चतुर्दशार, अष्टदल, षोडसार, तीनवृत तथा भूपुर से निर्मित है। इसमें चार ऊपर मुख वाले त्रिकोण शिव त्रिकोण, पाँच नीचे मुख वाले शक्ति त्रिकोण होते हैं। इस तरह त्रिकोण, अष्टकोण, दो दशार, पाँच शक्ति तथा बिंदु, अष्टकमल षोडस दल कमल तथा चतुरस्र हैं। ये इसकी कृपा से व्यक्ति को अष्टसिद्धि एवं नौ विधियों की कृपा प्राप्त होती है। इस यंत्र के पूजन अनुष्ठान से व्यक्ति को दश महाविद्याओं की भी कृपा प्राप्त होती हैं-
काली तारा महाविद्या षोडशी भुवनेश्वरी, भैरवी छिन्नमस्ता च विद्या घुमावती तथा।
मातंगी सिद्ध विद्या च कथिता बगलामुखी, एतादश महाविद्या सर्वतंत्रोषु गोपिता।।

काली, तारा, शोडषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, मातंगी, कमला और बगलामुखी ये दश महाविद्यायें हैं।

श्री यंत्र(shri yantra) का निर्माण स्वर्ण, चाँदी, स्फटिक, भोजपत्र आदि पर किया जाता है। भोज पत्र पर निर्मित यंत्र साधारण फलदायी रहता हैं। यह ताम्र पत्र पर श्रेष्ठ, चाँदी पर श्रेष्ठता तथा स्वर्ण पर निर्मित होने पर श्रेष्ठतम फल देता है। स्फटिक एवं मणि आदि पर निर्मित श्री यंत्र(sphatik shri yantra) भी अत्यंत शुभ फलप्रद रहता हैं। विभिन्न प्रसिद्ध तीर्थस्थलों पर स्थापित इन यंत्रों की महिमा सर्वविदित हैं। तिरूपति के बालाजी मंदिर में स्थापित श्री यंत्र (षोडश यंत्र), जगन्नाथ जी के मंदिर में भैरवी चक्र तथा श्री नाम मंदिर में सुदर्शन चक्र स्थापित हैं, जो यंत्रो की महत्ता का श्रेष्ठ उदाहरण हैं। इन तीर्थ स्थलों पर अपार संपत्ति है। विभिन्न तांत्रिक गंथों में श्री यंत्र की महिमा को अपार बताया गया है। इसमें सभी देवी देवताओं का निवास बताया गया है। यंत्र का निर्माण शुभ मुहुर्त जैसे- सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, रविपुष्य, गुरू पुष्य योग, चारों नवरात्र, दीपावली, शिवरात्रि आदि दिनों में किया जाना चाहिये या कराया जाना चाहिये। यह कार्य जटिल एवं श्रमसाध्य हैं। हर कोई इस कार्य को नहीं कर सकता है। कर्मकांड जानने वाले विद्वान पंडितों से यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा करवा लेना चाहिये। प्राण प्रतिष्ठा युक्त यंत्र शीघ्र फलदायी होते हैं। यदि ऐसा कराया जाना संभव न हो तो किसी विश्वसनीय प्रतिष्ठान, संस्थान से प्राण प्रतिष्ठा युक्त यंत्र प्राप्त कर अपनी पूजा में शुभ मुहूर्त में किसी पंडित से अनुष्ठान पूर्वक स्थापित करा लेना चाहिये। फिर प्रतिदिन पवित्र होकर इस यंत्र की पूजा करनी चाहिये, पवित्रता का ध्यान रखना अत्यावाश्यक हैं। यथा-देवोभूत्वा यजे देवं ना देवो देवमर्चयेत्। देवार्चा योग्यता प्राप्त्यैभूतिशुद्धि समाचरेत्।। इस यंत्र की प्रतिदिन पूजा करें तथा श्री सूक्त के 12 पाठ करें एवं निम्नलिखित लक्ष्मी मंत्रों में से किसी एक मंत्र का नियमित एक माला जप करने मात्र से ही धन संकट दूर होता है। व्यक्ति संपन्न एवं ऐश्वर्यशाली बन जाता है, जप के लिये ‘‘माला कमल गट्टे’’ की श्रेष्ठ है। रूद्राक्ष की माला का भी उपयोग किया जा सकता है। इस साधना से लक्ष्मी जी के साथ सभी देवी देवताओं की कृपा बनी रहती है। लेकिन व्यक्ति को सदाचरण नहीं छोड़ना चाहिये। चरित्र बल बनाये रखना एवं मांस मदिरा से दूर रहना चाहिये। यंत्र, मंत्र, तंत्र, देवी, देवता, यज्ञ, औषधि, तीर्थ, एवं गुरू में श्रद्धा अनिवार्य शर्त है, तभी ये चीजें फलदायी होती हैं। श्री यंत्र में तो इतना आकर्षण है कि, इसका दर्शन मात्र ही लाभ दे देता हैं।

मंत्र:-
(1) ऊँ श्रीं हृीं श्रीं कमले कमलालेय प्रसीद प्रसीद श्रीं हृीं ऊँ महालक्ष्मयै नमः।
(2) ऊँ हृीं श्रीं लक्ष्मीं महालक्ष्मी सर्वकामप्रदे सर्व-सौभाग्यदायिनी अभिमत्ं प्रयच्छ सर्वसर्वगत सुरूपे सर्वदुर्जयविमोचनी हृीं सः स्वाहा।
(3) ऊँ महालक्ष्मर्य च विद्महे विष्णु पत्नीम् च धीमहि तन्नों लक्ष्मी प्रचोदयात्।
(4) ऊँ श्रीं हृीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी रागच्छागच्छमममन्दिरे तिष्ठ स्वाहा।
(5) ऊँ श्रीं दृीं श्रीं नमः।
(6) ऊँ दृीं श्रीं लक्ष्मी दुर्भाग्यनाशिनी सौभाग्यप्रदायिनी श्रीं हृीं ऊँ।
(7) ऐं दृीं श्रीं क्लीं सौं जगत्प्रसूत्यै नमः।
(8) ऊँ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा।
(9) ऊँ श्री हृीं जयलक्ष्मी प्रियाय नित्यप्रदितचेत से लक्ष्मी सिद्धां देहाय श्रीं हृीं नमः।

संतान प्राप्ति मंत्र | Santaan Prapti Mantra – दीपावली विशेष साधना

जब जन्म कुण्डली में संतानोत्पत्ति योग न हो, अथवा अनेक बार गर्भ हानि होती रहे, या संतान दीघार्यु नहीं होती हो तो, उसके लिये यह प्रयोग महत्वपूर्ण है। इस साधना प्रयोग को दीपावली की रात्रि में संतान की इच्छा करने वाली महिला के संपन्न करने से संतान का योग प्रबल होकर संतानोत्पत्ति का योग बनता है। और वह संतान आज्ञाकारी होती है। इस प्रकार के प्रयोग से गृहस्थ जीवन अनुकूल एवं सुखदायक बन जाता है।

साधना विधि– साधिक को चाहिये कि वह दीपावली की रात्रि में स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण कर पूर्व की तरफ मुख कर के पीले आसन पर बैठ जाये, सामने लकड़ी के तख्ते पर एक थाली में चावल से त्रिकोण बनाकर उसके मध्य में मोती पर बने अभिमंत्रित मुक्ता गणपति की स्थापना करें, और फिर पंचोपचार (फूल, चावल, रोली, कलावा तथा धूप-दीप) से पूजा करके पुत्रजीवा की 108 दानों वाली माला से 21 माला अग्रलिखित मंत्र जप पूर्ण करें।

यही प्रयोग प्रत्येक माह गर्भवती होने तक संतान की इच्छा रखने वाली महिला को दोहराना चाहिये। निश्चय ही उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यही प्रयोग उस महिला का पति भी सम्पन्न कर सकता है, या घर का कोई अन्य सदस्य भी कर सकता है, परंतु उसको उस महिला के नाम का पहले संकल्प अवश्य लेना होगा। यदि कोई साधक-साधिका किसी दूसरे के लिये प्रयोग करना चाहे तो संकल्प ले लें कि ‘मैं यह प्रयोग अमुक व्यक्ति के लिये संपन्न कर रहा हूँ।

Santaan prapti mantra मंत्र – ऊँ नमो नारायणाय पुत्र सन्तानं देही देहि ठः ठः स्वाहा।

जप पूर्ण होने पर गणपति जी को मिष्ठान का भोग लगवाकर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें। वह माला जल में विसर्जित कर दें। मुक्ता गणपति का लॉकेट महिला को गले में धारण करना होगा।

साधना सामग्री – अभिमंत्रित मुक्ता गणपति (मोती पर बने गणपति), 108 दाने की पुत्रजीवा माला (putrajeeva mala)

न्यौछावर राषि – रू. 2000 रू

संपर्क – Shukracharya Delhi, 09810143516