महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र

इस दीपावली पर्व पर दीपावली की रात्रि यह प्रयोग सिद्ध करें- ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’

Dr.R.B.Dhawan (top best astrologer in delhi)

इस ‘महायंत्र’ की साधना केवल दीपावली पर्व पर ही सम्पन्न की जाती है। कमल धारिणी महालक्ष्मी का यह सिद्ध यंत्र यदि साधक के पास रहता है, तो अवश्य ही वह अपने जीवन में आर्थिक परेशानी से उबर कर भू-सम्पदा का स्वामी होता है, केवल मात्र घर में इस यंत्र के रखने से ही उसे धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। यह यंत्र तो अन्धकार में प्रकाश की तरह है, जो साधक इस अद्वितीय महायंत्र की स्थापना दीपावली की रात्रि में अपने घर या व्यापार स्थान में अथवा दोनो ही स्थानों में करता है, वह वास्तव में ही सौभाग्यशाली माना जाता है, वास्तव में ही उसके घर में समृद्धि के देव निवास करते हैं, वास्तव में ही उसके घर में लक्ष्मी को बरसना पड़ता है, और जब तक वह ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ घर में स्थापित रहता है, तब तक उस घर में लक्ष्मी का निवास बराबर बना रहता है। ऐसा महायंत्र घर में स्थापित होने पर कर्ज, उतर जाता है, आर्थिक परेशानी के कारण होने वाले घर के लड़ाई झगड़े कुछ ही समय में समाप्त हो जाते हैं, व्यापार की समस्या दूर होती हैं, क्योंकि व्यापार में वृद्धि होने लगती है, आर्थिक उन्नति और राज्य में सम्मान प्राप्ति होती है, और उसके जन्म-जन्म के दुःख और दर्द समाप्त होने लगते हैं।

वास्तव में ही इस ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ की जितनी प्रशंसा उपनिषदों में की है, और आगे के ऋषियों ने इस महायंत्र की जितनी विशेषताएं बतलाई है, वे अपने आप में अन्यतम हैं। वशिष्ठ, विश्वामित्र, आदि ऋषियों ने इस प्रकार के महायंत्र को ‘कामधेनु’ की संज्ञा दी है। कुबेर ने भी इस महायंत्र को फलप्रदायक बताया है। इस ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ को स्थापित कर, इससे संबंधित मंत्र के जप से असीम लक्ष्मी का भण्डार प्राप्त कर जीवन में भरपूर आर्थिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है। इस यंत्र को तांत्रिक और मांत्रिक दोनों शक्तियों से सिद्ध व सम्पन्न किया जाता है, सिद्ध अवस्था में यह महायंत्र अपने आप में अद्वितीय है।

सिद्धि-साधना प्रयोग :-
यह महायंत्र वर्ष में केवल एक दिन ‘दीपावली की रात्रि’ में स्थिर लग्न में, महालक्ष्मी पूजन के साथ ही सिद्ध हो सकता है, और दीपावली के दिन महालक्ष्मी का पूजन केवल स्थिर लग्न में ही सम्पन्न किया जाना चाहिये, और अमावस्या की रात्रि को वृषभ और सिंह मात्र दो ही स्थिर लग्न कहते हैं, अतः इन लग्न-मुहर्त में ही सिद्धि-साधना प्रयोग सम्पन्न होना चाहिये। इस वर्ष दीपवाली का पर्व 7 नवम्बर 2018 के दिन है, तथा दीपावली के दिन वृषभ लग्न सांयकाल 17 बजकर 57 मिनट से रात्रि 19 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। और सिंह लग्न मध्य रात्रि को 00 (24) बजकर 27 मिनट से 02 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। इन दोनो महूर्त में स्वाती नक्षत्र 19 बजकर 37 मिनट तक, इसके पश्चात विशाखा नक्षत्र पढेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इन दोनो लग्नों का यह समय दिल्ली प्रदेश के लिये है। शेष भारत अथवा विदेशों में रहने वाले पाठक अपने देश या प्रदेश के लिये उपरोक्त स्थिर लग्नों का समय shukracharya कार्यालय से फोन द्वारा पता लगा लें। क्योंकि ज्योतिष की दृष्टि से विचार करने पर यह स्पष्ट होता है, कि यंत्र-मंत्रों की सिद्धि के लिये यह दोनों लग्न (वृष तथा सिंह) अत्यन्त विशेष फलकारक तथा प्रभावशाली हैं। यद्यपि शास्त्रों में बताया गया है, कि ऐसा महायंत्र स्थापित करने के समय की जाने वाली साधना के पश्चात् इस के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की महालक्ष्मी साधना करना आवश्यक नहीं है, परन्तु फिर भी यदि साधक एक माह में एक बार इस ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ को गूगल का धूआँ (धूप) देता रहे तो यह वर्षो तक प्रभावशाली बना रहता है।

सबसे पहले साधक दीपावली की रात्रि में शुभ लग्न मुहर्त से पूर्व स्नानादि करके पवित्र होकर शुभ मुहूर्त में अपने पूजा स्थान में बैठ जाये यदि विवाहित हैं, तो अपनी गृहलक्ष्मी के साथ अपने पूजा स्थान में बैठ जायें और सामने एक लकड़ी के तख्ते पर पीला रेशमी वस्त्र बिछा कर उस पर इस ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ को स्थापित कर दें, इसके बाद फूल, चावल, रोली, कलावा तथा सुपारी समर्पित करके यंत्र की पंचोपचार पूजा करनी चाहिये तथा फिर शुद्ध केशर से इस ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ पर चारों कोनों पर एक-एक बिन्दियां लगायें जो सिद्धि-समृद्धि की प्रतीक है। इसके बाद सीधे हाथ में जल ले कर विनियोग करें-

विनियोग-
अस्य श्री महालक्ष्मी हृदयमालामंत्रस्य भार्गव ऋषिः आद्यादि श्री महालक्ष्मी देवता,अनुष्टुपादिनानाछन्दांसि, श्री बीजम् हृीं शक्तिः, ऐं कीलकम् श्री महालक्ष्मी प्रसाद सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।

इसके बाद साधक हाथ में जल ले कर यह संकल्प करें कि मैं अमुक गौत्र अमुक पिता का पुत्र, अमुक नाम का साधक दीपावली के पर्व पर शुभ लग्न मुहर्त में भगवती महालक्ष्मी को नवनिधियों के साथ अपने घर में स्थापित करने के लिए यह प्रयोग सम्पन्न कर रहा हूँ। ऐसा कह कर हाथ में लिया हुआ जल भूमि पर छोड़ दें, और फिर ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ के सामने शुद्ध घृत के पांच दीपक लगावें (यह दीपक पूरी रात्रि जलते रहें इतना घी इनमें डाल देना चाहिये।) सुगन्धित अगरबत्ती प्रज्वलित करें, और दूध के बने हुए प्रसाद का नैवेद्य समर्पित करें, इसके बाद हाथ जोड़ कर ध्यान करें।

ध्यान-
हस्तद्वयेन कमले धारयन्तीं स्वलीलया।
हारनूपुरसंयुक्तां लक्ष्मीं देवी विचिन्तये।।

इसके बाद साधक स्फटिक की ‘सिद्धलक्ष्मी माला’ से निम्न मंत्र की 21 माला मंत्र जप करें, इसमें ‘सिद्धलक्ष्मी माला’ का ही प्रयोग होता है, यह विशेष ध्यान रखें।

महामंत्र-
ॐ श्रीं हृीं ऐं महालक्ष्म्यै कमल धारिण्यै सिंहवाहिन्यै स्वाहा।

इसके बाद साधक लक्ष्मीजी की आरती करे और ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ को तथा ‘सिद्धलक्ष्मी माला’ को उसी आसन वाले पीले वस्त्र से लपेट कर अपनी तिजोरी में रख दें, या फिर आसन पर ही पूजा स्थान में रहने दें, तथा प्रसाद को घर के सभी सदस्यों में वितरित कर दे, इस प्रकार यह साधना सम्पन्न होती है, जो कि इस पर्व की श्रेष्ठतम और अद्वितीय साधना कही जा सकती है।

दीपावली साधना सामग्री :-
इस साधना को सम्पन्न करने के लिए कुछ प्राणप्रतिष्ठित आवश्यक सामग्री की आवश्यकता होती है :- 1. शुद्ध चांदी पर विशेष मुहर्त में निर्मित ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’। 2. स्फटिक की ‘सिद्धलक्ष्मी माला’ । 3. शुद्ध केशर। यह सामग्री आप हमारे कार्यालय से मंगवा सकते हैं। परंतु इस ‘दीपावली साधना सामग्री’ का पैकिट आपको दीपावली से 15-20 दिन पहले आर्डर करना चाहिए।

यदि आप साधना नहीं कर सकते-

यदि आप ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र साधना’ सम्पन्न नहीं कर सकते, अथवा आप को साधना पद्धति जटिल लगती है, तब एेसी स्थिति में आप दीपावली की रात्रि सिद्ध मुहूर्त में सिद्ध किया गया ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ हमारे कार्यालय में सम्पर्क करके आर्डर कर सकते हैं। (कार्यालय से मंगवा सकते हैं।) इस शुद्ध चांदी पर निर्मित ‘महालक्ष्मी सिद्ध महायंत्र’ तथा स्फटिक की ‘सिद्धलक्ष्मी माला’ के लिये न्यौक्षावर राशि मात्र 5100/-रू है।

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