श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष साधना

श्री महालक्ष्मी कल्पवृक्ष दीपावली सिद्धि प्रयोग :-

Dr.R.B.Dhawan (top best astrologer in delhi)

वैसे तो श्रीमहालक्ष्मीजी की साधना अनेक अवसरों पर की जाती है, परंतु दीपावली पर्व श्रीमहालक्ष्मीजी की विशेष कृपा प्राप्ति का ऐसा पर्व है, जिस पर्व को साधक वर्ग तथा तंत्र के ज्ञाता महासिद्धिपर्व के नाम से पुकारते हैं, कारण यह है, कि प्रत्येक वर्ष में साधारण पर्व तो कम-से-कम 8 (1. चैत्र नवरात्र। 2. दो गुप्त नवरात्र। 3. शारदीय नवरात्र। यह चार नवरात्र पर्व हैं, तथा 4. होली। 5. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी। 6. महाशिवरात्रि। और 7. कम से कम दो ग्रहणकाल।) यह सभी 8 सिद्धिपर्व हर वर्ष साधकों के लिये उपलब्ध होते हैं। परंतु इसके अतिरिक्त महासिद्धिपर्व केवल एक ही उपलब्ध रहता है, और वह है- श्रीमहालक्ष्मीपर्व महासिद्धिपर्व ‘दीपावली पर्व’ जो सभी साधकवर्ग को प्रिय होता है, तथा इस विशेष अवसर की प्रतीक्षा हर एक को रहती है। चाहे वे तांत्रिक हो या साधक अथवा साधारण गृहस्थ ही हो। यहाँ आगे की पंक्तियों में इसी महासिद्धिपर्व (दीपावली) पर की जाने वाली एक विशेष साधना का उल्लेख किया जा रहा है, जिसे कोई भी साधक या गृहस्थ चाहे वे स्त्री हो या पुरूष सिद्ध कर सकता है, आवश्यकता है तो केवल दृढ़ इच्छाशक्ति की।

प्रस्तुत साधना “सिद्ध श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष” सिद्धि ऐसी महत्वपूर्ण साधना है, जिसमें कमलधारणी महालक्ष्मी के एक ऐसे यंत्र को सिद्ध किया जाता है, जिसमें एक ओर लक्ष्मी जी का यंत्र तथा दूसरी ओर श्रीलक्ष्मी का चित्र उत्कीर्ण हुआ हो, तथा वह यंत्र ऐसे आकार में बनाया गया हो, जो कि गले में धारण किया जा सके इसके लिए एक चांदी के ऐसे लाकेट को सिद्धि किया जाता है, जिसके एक ओर लक्ष्मी जी का यंत्र तथा दूसरी ओर श्री लक्ष्मी का चित्र उत्कीर्ण हुआ हो, यह साधना केवल दीपावली पर्व की मध्यरात्रि में ही सम्पन्न की जाती है। कमल धारिणी महालक्ष्मी की यह चांदी पर उत्कीर्ण लॉकेट “सिद्ध श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष” कहलाती है। इस सिद्ध लघु प्रतिमा को सिद्ध करने के उपरांत साधक या साधिका इसे गले में धारण कर सकते हैं। अर्थात सिद्ध श्री महालक्ष्मी कल्पवृक्ष हमेशा अपने ही निकट प्रकाशित होता रहता है। इस साधना को सम्पन्न करने वाले साधक या गृहस्थ को कभी भी किसी भौतिक वस्तु की कमी नही रहती। जब भी आवश्यकता हो मां लक्ष्मी के चरणों में बैठकर सच्चे मन से उसे याद करें श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष की तरह साधक की हर मुराद पूर्ण करती हैं, यदि साधक ने यह साधना सिद्ध कर ली है, और उसके पास अपना भवन नहीं, या वाहन नहीं या फिर विवाह अथवा संतान बाधा है, तो कल्पवृक्ष की तरह साधक सिद्ध श्रीमहालक्षमी कल्पवृक्ष प्रतिमा के समक्ष अपनी कामना रखे, वास्तव में ही वह कामना चाहे विवाह की हो या संतान के लिये अथवा भवन, वाहन के लिये हो अवश्य साधक इनका स्वामी होता है। इसी लिये तो इस साधना को तंत्र क्षेत्र के विद्वानों ने अति गोपनीय साधनाओं की श्रेणी में रखा है। साधना के उपरांत अपने गले में यह सिद्ध कल्पवृक्ष रखने मात्र से ही साधक को धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह साधना अन्धकार में प्रकाश की तरह है, जो साधक इस अद्वितीय साधना को दीपावली की रात्रि में सिद्ध करता है, (अपने घर या व्यापार स्थान में अथवा दोनो ही स्थानों में साधना द्वारा “सिद्ध श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष”) धारण करता है, वह वास्तव में ही सौभाग्यशाली माना जाता है, वास्तव में ही उसके घर तथा व्यापार स्थल में समृद्धि के देव निवास करते हैं, वास्तव में ही उसके घर में कल्पवृक्ष स्थापित रहता है। और जब तक वह “सिद्ध श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष” गले में धारण किये रहता है, तब तक उस के घर में महालक्ष्मी का निवास सदा बना रहता है। देखा गया है कि इस साधना की सिद्धि करने वाले साधक के घर में जब से “सिद्ध श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष” स्थापित हुआ, कुछ ही दिनों में उसका कर्ज उतर गया, आर्थिक तंगी के कारण होने वाले घर के लड़ाई-झगड़े समाप्त हो गये, व्यापार में वृद्धि होने लगी, आर्थिक उन्नति और राज्य में सम्मान प्राप्ति होने लगी है, और उसके जन्म-जन्म के दुःख और दर्द समाप्त होने लगे हैं। वास्तव में ही इस सिद्धि की जितनी प्रशंसा उपनिषदों में की है, और आगे के ऋषियों ने भी इस साधना की विशेषताएं बतलाई हैं, वे अपने आप में अन्यतम हैं। इस सिद्धि से प्राप्त ऊर्जा के प्रभाव से श्रीमहालक्ष्मी का असीम भण्डार प्राप्त कर जीवन की पूर्णता प्राप्त की जा सकती है। इस सकारात्मक ऊर्जा में तांत्रिक और मांत्रिक दोनों शक्तियों का पूर्ण समावेश है, यह सिद्धि अपने आप में अद्वितीय है।

साधना प्रयोग-
यद्यपि शास्त्रों में बताया गया है, कि ऐसी महासाधना हर मनुष्य को सिद्ध करना आवश्यक है, क्योंकि यदि साधक को सदा एक जैसी ऊर्जा बनाये रखनी है, तो जीवन में एक बार इस श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष साधना को अवश्य सिद्ध करना चाहिए, जिस की सकारात्मक ऊर्जा वर्षो तक साधक के शरीर में प्रभावशाली बनी रहती है।

इस वर्ष दीपावली पर्व 7 नवम्बर 2018 के दिन है, इस दिन अमावस्या तिथि दिल्ली की गणना अनुसार लगभग 20:32 तक रहेगी। महालक्ष्मी पूजन किसी स्थिर लग्न में होना उचित है, इस दिन वृषभ और सिंह दो स्थिर लग्न होंगी। वृषभ लग्न सांयकाल 17 बजकर 57 मिनट से रात्रि 19 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। और सिंह लग्न मध्य रात्रि को 00 (24) बजकर 27 मिनट से 02 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। इन दोनो महूर्त में स्वाती नक्षत्र 19 बजकर 37 मिनट तक, इसके पश्चात विशाखा नक्षत्र पढेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इन दोनो लग्नों का यह समय दिल्ली प्रदेश के लिये है। शेष भारत अथवा विदेशों में रहने वाले पाठक अपने देश या प्रदेश के लिये उपरोक्त स्थिर लग्नों का समय shukracharya कार्यालय से फोन द्वारा पता कर सकते हैं। इन्हीं दो स्थिर लग्न में से किसी लग्न में जब अनुकूल चौघड़िया भी हो तब महालक्ष्मी पूजन किया जा सकता है।

7 नवम्बर 2018 के चौघड़िया मुहूर्त-

दिन की चौघड़िया
लाभ 06:42 से 08:02
अमृत 08:02 से 09:22
काल 09:22 से 10:42
शुभ 10:42 से 12:02
रोग। 12:02 से 13:21
उद्वेग 13:21 से 14:40
चर 14:40 से 16:00
लाभ 16:00 से 17:20

रात्रि की चौघड़िया
उद्वेग 17:10 से 19:00
शुभ 19:00 से 20:41
अमृत 20:41 से 22:22
चर 22:22 से 24:02
रोग 24:02 से 25:42
काल 25:42 से 27:22
लाभ 27:22 से 29:02
उद्वेग 29:02 से 30:42

1. चर, लाभ, अमृत और शुभ की चौघड़िया पूजन के समय होनी चाहियें। इस प्रकार शुद्ध ज्योतिषीय गणनाओं तथा विशेष दृष्टिकोंण से यह स्पष्ट होता है, कि साधना व पूजन के लिये 7 नवम्बर 2018 की रात्रि 19:00 से 19:52 वृषभ लग्न के साथ साथ शुभ का चौघडिया भी अत्यन्त विशेष फलदायक तथा सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त हैं। अतः सभी गृहस्थ तथा साधक-साधिकाओं से मेरा यही आग्रह है की वे इस वर्ष इसी मुहूर्त में दीपावली पूजन अथवा तंत्र-मंत्र सम्बंधी साधनायें सम्पन्न करें।

विनियोग- अस्य श्री महालक्ष्मी हृदयमाला मंत्रस्य भार्गव ऋषिः आद्यादि श्री महालक्ष्मी देवता, अनुष्टुपादिनाना छन्दांसि, श्री बीजम् हृीं शक्तिः, ऐं कीलकम् श्री महालक्ष्मी प्रसाद सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।

इसके बाद साधक हाथ में जल ले कर संकल्प करें कि मैं अमुक गौत्र अमुक पिता का पुत्र, अमुक नाम का साधक दीपावली के पर्व पर भगवती लक्ष्मी को नवनिधियों के साथ अपने घर में स्थापित करने के लिये यह प्रयोग सम्पन्न कर रहा हूँ। ऐसा कह कर हाथ में लिया हुआ जल भूमि पर छोड़ दें, और फिर “सिद्ध श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष” (चांदी पर उत्कीर्ण लॉकेट) के सामने शुद्ध घृत के पांच दीपक लगावें (यह दीपक पूरी रात्रि जलते रहें इतना घी इनमें डाल देना चाहिये।) सुगन्धित अगरबत्ती प्रज्वलित करें, और दूध के बने हुये प्रसाद का नैवेद्य समर्पित करें, इसके बाद हाथ जोड़ कर ध्यान करें।

ध्यान- हस्तद्वयेन कमले धारयन्तीं स्वलीलया। हारनूपुरसंयुक्तां लक्ष्मीं देवी विचिन्तये।।

इसके बाद साधक स्फटिक की सिद्धलक्ष्मी माला से निम्न मंत्र की 11 माला मंत्र जप करें, इसमें सिद्धलक्ष्मी माला का ही प्रयोग होता है, यह विशेष ध्यान रखें।

महामंत्र- ॐ श्रीं हृीं ऐं महालक्ष्म्यै कमल धारिण्यै पुष्पसिंहासन्यै स्वाहा।

इसके बाद साधक लक्ष्मीजी की आरती करें और “सिद्ध श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष” को अपने पूजास्थान तथा सिद्धलक्ष्मी माला को पीले वस्त्र में लपेटकर अपनी तिजोरी में रख दें या पूजा स्थान में रहने दें, प्रसाद को घर के सभी सदस्यों में वितरित कर दें, इस प्रकार यह साधना सम्पन्न होती है जो कि इस वर्ष की श्रेष्ठतम और अद्वितीय साधना कही जा सकती है।

साधना सामग्री :- स्फटिक की सिद्धलक्ष्मी माला, तथा “सिद्ध श्रीमहालक्ष्मी कल्पवृक्ष” (चांदी पर उत्कीर्ण लॉकेट)। इस साधना सामग्री के लिए न्यौक्षावर राशि 3600/-रू मात्र है। जो कि विशेष मुहर्त में निर्मित करवाकर श्रीमहालक्ष्मी के सिद्ध मंत्रों से प्राणप्रतिष्ठित है, साधना सामग्री का पैकिट आप भी कार्यालय से मंगवा सकते हैं। इस पैकिट को जितना जल्दी हो सके मंगवा लें। दीपावली से कम से कम 20-25 दिन पहले तो अवश्य ही कार्यालय से सम्पर्क करके यह साधना सामग्री मंगवा लेना उचित होगा। क्योंकि पार्सल डाक द्वारा भेजा जाता है। पार्सल पहुँचने में कभी-कभी 10 से 15 दिन या अधिक का समय भी लग जाता है। अतः आपकी साधना समग्री सही समय पर आपके पास पहुँच जाये, इस बात का विशेष ध्यान रखें।

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