जीवन संचालन करने वाले मुख्य पाँच भौतिक तत्व

जीवन संचालन करने वाले मुख्य पाँच भौतिक तत्व धरती पर जीवन का संचालन करने वाले मुख्य पाँच भौतिक तत्व ही हैं-

  1. पृथ्वी
  2. अग्नि
  3. आकाश
  4. जल
  5. वायु

इन सबसे मिलकर यह सारा ब्रह्माण्ड बना है। हमारा शरीर भी पंचभूत है इन्हीं पांच तत्त्वों से भरपूर जीवन में मनुष्य वास्तु में इन पांचों तत्वों को संतुलित करके ही सुख समृद्धि तथा शांति प्राप्त कर सकता है लेकिन इन पांचों तत्वों में से एक भी तत्त्व की कमी हो तो हानि, रोग, शोक आदि का मुंह देखना पड़ता है। प्राचीनकाल में हमारे भवन का निर्माण करने वाले राज मिस्त्रियों को वास्तु का बहुत ज्ञान था। जहां मनुष्य, वास करता है। उसी का नाम वास्तु है, सुखी समृद्धि एवं सुखमय जीवन यापन करने के लिए वास्तु के नियमों का पालन अवश्य करना चाहिये।

पिरामिडोलॉजी’ नामक एक विशुद्ध विज्ञान का विकास प्राचीनकाल में इसी उद्देश्य के लिये हमारे ऋषियों के द्वारा किया गया है। आज इसके प्रवक्ताओं का मत है कि पिरामिडों के विशिष्ट आकार प्रकार में ‘अलौकिक शक्ति’ छिपी पड़ी है। इनकी आकृति इतनी मायावी है कि उसे निखिल ब्रह्माण्ड का मानव कृत लघु संस्करण कहा जा सकता है। इनमें ‘सूक्ष्म ब्रह्माण्डीय ऊर्जा’ का बहुलता से एकत्रीकरण होता रहता है। जो जीवित तथा निर्जीव पदार्थों को प्रभावित किए बिना नहीं रहती।

पिरामिडनुमा भवन चाहे वह चैकोर हो अथवा गोलाकार, विभिन्न प्रकार की ब्रह्मंडीय तरंगों को आकर्षित कर अपना प्रभाव मानव शरीर और मन पर अवश्य डालते हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि सभी पिरामिड उत्तर-दक्षिण एक्सिस पर बने हैं। यह भी एक वैज्ञानिक रहस्य है जो बताता है कि भू चुम्बकत्व एवं ब्रह्मांडीय तरंगों का इस विशिष्ट संरचना से निश्चय ही कोई संबंध है। उत्तर-दक्षिण गोलाद्धों को मिलाने वाली रेखा पृथ्वी की चुम्बकीय रेखा है। चुम्बकीय शक्तियाँ विद्युत तरंगों से सीधी जुड़ी हुई हैं जो यह दर्शाती हैं कि ब्रह्मांड में बिखरी मैग्नेटोस्फीयर में विद्यमान चुम्बकीय किरणों को संचित करने की अभूतपूर्व क्षमता पिरामिड में है। यही किरणें एकत्रित होकर अपना प्रभाव अंदर विद्यमान वस्तुओं या जीवधारियों पर सकारात्मक रूप से डालती हैं। इन सभी पिरामिडों का प्रयोग यदि आज की आवश्यकता के अनुरूप किया जाये तो मनुष्य अवश्य इनसे अनेक लाभ उठा सकता है।