Diwali Pooja Muhurat 2016

diwali pooja muhurat 2016

Diwali Pooja Muhurat 2016

30 अक्तूबर 2016 दीपावली पर्व है। दीपावली की रात्रि प्रदोषकाल में महालक्ष्मी पूजन (Diwali Pooja Muhurat 2016) की परम्परा आदिकाल से चली आ रही है। इस दिन सूर्य व चन्द्रमा तुला (शुक्र की राशि) में विचरण कर रहे होते हैं।

कार्तिक अमावस्या की रात्रि स्थिर लग्न (वृष या सिंह) में महानिशीथ काल में महालक्ष्मी का पूजन करने से माता लक्ष्मी साधक के घर स्थाई निवास करती हैं।

इस वर्ष महालक्ष्मी पूजन MahaLaxmi Diwali Pooja Muhurat 2016 का शुभ तथा विशेष मुहूर्त सॉय 18:28 से आरम्भ होकर 20:22 तक रहेगा।

इस दिन सॉय 18:28 से 20:22 तक के समय में अमावस्या तिथि अंतर्गत वृष लग्न तथा शुभ, अमृत तथा चर का चौघडिया का शुभ योग बना है।

स्थिर लग्न के मुहूर्त में महालक्ष्मी पूजन करने से धन-धान्य स्थिर रहता है। इस मुहूर्त में दीपदान, गणपति सहित महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, बही-खाता पूजन तथा धर्मस्थलों में और अपने घर में दीप प्रज्जवलित करना चाहिये।

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दीपावली पूजन तथा इस रात्रि में की जाने वाली विशेष साधनाओं का विस्तार पूर्वक विवरण जानने के लिये देखें गुरूजी द्वारा प्रकाशित अॉनलाईन ज्योतिषीय मासिक पत्रिका aapkabhavishya यह पत्रिका www.shukracharya.com पर नि:शुल्क उपलब्ध है।

इस के अतिरिक्त AapKaBhavishya.in पर भी गुरूजी (डा. आर.बी.धवन) के ज्योतिषीय लेख भी आप पढ़ सकते हैं।

Santaan Prapti Upaya for Diwali – इस दीपावली करें संतान प्राप्ति उपाय

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Santaan Prapti Upaya संतान प्राप्ति उपाय (एक दिवसीय दीपावली साधना प्रयोग)

कुण्डली में संतानोत्पत्ति योग न हो अथवा अनेक बार गर्भ हानि होती रही हो या संतान दीघार्यु नहीं होती हो तो उसके लिए यह संतान प्राप्ति उपाय Santaan Prapti Upaya महत्वपूर्ण है। इस साधना प्रयोग को दीपावली की रात्रि में संतान की इच्छा करने वाली महिला के संपन्न करने से संतान का योग प्रबल होकर एक वर्ष में संतानोत्पत्ति अवश्य होती है। और वह संतान आज्ञाकारी होती है। इस प्रकार के प्रयोग से गृहस्थ जीवन अनुकूल एवं सुखदायी बन जाता है।

संतान प्राप्ति उपाय Santaan Prapti Upaya के लिए साधिका को चाहिए कि वह दीपावली की रात्रि में स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण कर पूर्व की तरफ मुख कर के पीले आसन पर बैठ जाएं सामने लकड़ी की चौकी पर एक थाली में चावल से त्रिकोण बनाकर उसके मध्य में मोती पर बने अभिमंत्रित मुक्ता गणपति की स्थापना करें और फिर पंचोपचार (फूल, चावल, रोली, कलावा तथा धूप-दीप) से पूजा करके पुत्रजीवा की 108 दानों वाली माला से 51 माला अग्रलिखित मंत्र जप पूर्ण करें।

यही प्रयोग प्रत्येक माह शुक्ल पंचमी के दिन गर्भवती होने तक पुत्र की इच्छा रखने वाली महिला को दोहराना चाहिये। निश्चय ही उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यही संतान प्राप्ति उपाय Santaan Prapti Upaya उस महिला का पति या घर का कोई अन्य सदस्य भी कर सकता है, परंतु उसको उस महिला के नाम का संकल्प अवष्य लेना होगा। यदि कोई साधक-साधिका किसी दूसरे के लिए प्रयोग करना चाहे तो संकल्प ले लें कि ‘मैं यह प्रयोग अमुक व्यक्ति के लिए संपन्न कर रहा/रही हूँ।

मंत्र- ऊँ नमो नारायणाय पुत्र सन्तानं देही देहि ठः ठः स्वाहा।

जप पूर्ण होने पर गणपति जी को मिष्ठान का भोग लगवाकर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें। वह माला जल में विसर्जित कर दें। मुक्ता गणपति का चांदी में लॉकेट बनवाकर महिला को गले में धारण करना चाहिये।

साधना सामग्री– अभिमंत्रित मुक्ता गणपति (मोती पर बने गणपति), 108 दाने की पुत्रजीवा माला।

न्यौछावर राशि रू. 3100

संपर्क : Sukracharya, F-265, Street No. 22, Laxmi Nagar, Delhi-110092, Mob: 09810143516

कुण्डली में विवाह प्रतिबंधक योग Vivah Pratibandak Yog in Kundli

कुण्डली में विवाह प्रतिबंधक योग Vivah Pratibandak Yog in Kundli

मित्रों इस लेख में जातकों की कुंडली में विवाह प्रतिबंधक योग (vivah pratibandak yog in kundli) के बारे में आपको अति अन्वेषित एवं अनुभव युक्त लेख सम्पादित कर रहा हूँ। शेयर करें व ज्ञान को असीम जनता तक पहुँचायें।

बचपन की सीमा लांघ कर जैसे ही मनुष्य यौवनावस्था में प्रवेश करता है, उसे एक जीवन-साथी की आवश्यकता महसूस होती है। यह प्राकृतिक नियम है, यौवन के आते ही युवा स्त्री अथवा पुरुष में विवाह की इच्छा उत्पन्न होती ही है। आदिमकाल में तो असभ्य मानव अन्य प्राणियों की तरह यौन सम्बंध बनाकर अपनी यौनेच्छा की पूर्ति कर लेता था, किन्तु ज्यों-ज्यों मनुष्य में सामाजिक भावना का उदय हुआ उसने समाज की व्यवस्था को बनाये रखने के लिये ‘विवाह’ vivah जैसी सामाजिक प्रथा को जन्म दिया, और स्वीकार किया।

तभी से समाज की स्वीकृति के बिना स्थापित किया गया यौन सम्बंध अनैतिक समझा जाने लगा। भारत में विवाह को एक पवित्र बंधन माना जाता है, प्रणय-सूत्र में बंधते ही स्त्री और पुरुष दोनों ही कुछ व्यक्तिगत पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों को समझने लगते हैं। जिनके फलस्वरूप उनमें प्रेम, स्नेह, आत्मसमर्पण एवं कर्त्तव्च्य परायणता से युक्त भावनाओं का जन्म होता है, और इसी कारण उनका विवाहित अथवा गृहस्थ जीवन सुखमय बन पाता है।

सुखमय और प्रेम पूर्ण विवाहित जीवन के लिये यह आवश्यक है कि, स्त्री और पुरुष दोनों ही उत्तम चरित्र से युक्त हों, एक दूसरे को पसंद करते हों, और एक-दूसरे के सुख दुःख में भाग लेते हों, और एक दूसरे को इतना अधिक प्रेम करते हों कि अल्प समय के लिये बिछुड़ने पर बेचैनी का अनुभव करते हों।

अगर स्त्री या पुरुष में से कोई एक अथवा दोनों अपने दायित्वों को नहीं समझते और उनमें उपरोक्त भावनाओं का अभाव हो तो, उनका जीवन कलहपूर्ण होने की संभावना बनी रहती है, या वे विवाहित जीवन में सुख का अभाव या न्यूनता का अनुभव करने लगते हैं, जिसके फलस्वरूप तलाक अथवा आत्महत्या तक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

यह सभी तो तब महत्वपूर्ण है, जब जातक की जन्म कुण्डली में विवाह का योग उचित समय में बन रहा हो, इसके विपरीत यदि किसी जातक की जन्म कुण्डली में विवाह का योग ही नहीं बन रहा हो, अर्थात् विवाह प्रतिबंधक योग बना हो तब! ऐसी स्थिति में जातक के साथ-साथ उसके माता-पिता भी चिंता में डूबे रहते हैं।

अनेक उपाय, अनेक यत्न-प्रयत्न करने पर भी विवाह नहीं होता, तब निराश होकर ज्योतिषीयों और कभी-कभी ओझाओं मौलवीयों की शरण में जाते हैं। वस्तुतः विवाह का योग या विवाह का सुख प्रारब्ध का खेल समझा जाता है, जिसकी सूचना हमें जन्म समय की ग्रह स्थिति (जन्म कुण्डली kundli) से मिलती है।

कभी-कभी जन्म कुण्डली kundli में अनेक प्रकार के ग्रहयोग से विवाह प्रतिबंधक योग (vivah pratibandak yog in kundli) का निर्माण हो रहा होता है। इन योगों के साथ-साथ यदि उन विवाह प्रतिबंधक योग बनाने वाले ग्रहों पर किसी शुभ ग्रह की कृपा नहीं होती तो विवाह या विवाह होकर भी वैहिक सुख से जातक हीन रहता है। शुभ ग्रह यदि अपना शुभ प्रभाव डाल रहे हों, तब वह विवाह प्रतिबंधक योगों को भीे भंग कर देते हैं।

अतः एक कुशल विद्वान को विवाह प्रतिबंध करने वाले ग्रहयोंगों के साथ-साथ यह भी विचार करना आवश्यक होता है कि, विवाह प्रतिबंधक योगों पर शुभग्रह अपना प्रभाव किस हद तक डाल रहे हैं? शुभ ग्रह अपना प्रभाव डाल भी रहे हैं अथवा नहीं?

आगे एक जातक की जन्म कुण्डली प्रस्तुत की जा रही है, इस कुण्डली में किस प्रकार विवाह प्रतिबंधक ग्रहों (vivah pratibandak yog in kundli) का प्रभाव है, देखें-
30/10/1982 16:37 Vadodara

vivah pratibandak yog in kundli
vivah pratibandak yog in kundli

ग्रहों के भोगांश
लग्न        11रा    17° 25″ 15′
सूर्य         06रा   13° 06″ 03′
चन्द्रमा    11रा   16°  15″ 58′
मंगल      08रा  05° 26″ 39′
बुध          06रा  00° 22″ 41′
गुरू          06रा  23° 41″ 50′
शुक्र         06रा   11° 55″ 50′
शनि        06रा  03° 00″ 40′
राहु          02रा  13°  33″ 07′

आज इस जातक की आयु लगभग 34 वर्ष हो चुकी है, अभी तक अनेक प्रयत्न कर चुके इसके अभिभावक अनेक उपाय कर, कर के थक चुके हैं, परंतु विवाह नहीं हो रहा। मीन लग्न की इस कुण्डली में सप्तम भाव का स्वामी बुध है, यह ग्रह शुक्र की तुला राशि में परंतु अष्टम भाव में सूर्य से अस्त है, हालांकि सप्तम भाव पर पंचमेश चन्द्रमा की सप्तम पूर्ण दृष्टि का योग है, कुण्डली में लग्न तथा चन्द्र लग्न दोनों से सप्तमेश बुध अस्त तथा अष्टम भाव में विवाह का प्रतिबंध सूचित कर रहा है।vivah pratibandhak yog in navansh kundli

विवाह कारक शुक्र द्वितीय व अष्टम भावाधिपति होकर अष्टम भाव में स्थित है, बेशक यह ग्रह स्वग्रही है परंतु इस स्थान में अशुभ फल ही प्रदान कर रहा है, यह शुक्र यहां सूर्य से अस्त भी है। शुक्र तथा बुध का षष्ठेश सूर्य के साथ अष्टम भाव में अस्त होना निश्चित ही विवाह प्रतिबंधक योग (vivah pratibandak yog in kundli) का निर्माण कर रहा है।

यहां लग्नेश गुरू शुभ ग्रह होने के कारण थोड़ा शुभ फल दे सकता था परंतु यह ग्रह भी सूर्य के सानिध्य में अस्त है। लग्नेश गुरू, सप्तमेश-चतुर्थेश बुध तथा विवाह सुख का कारक ग्रह शुक्र अष्टम भाव में तो हैं ही, साथ-ही अस्त भी हैं।

इन ग्रहों के साथ कुण्डली में भाग्य स्थान के स्वामी मंगल पर शनि की क्रूर दृष्टि भी विवाह प्रतिबंधक योग (vivah pratibandak yog in kundli) में अपना योगदान दे रही है। वर्तमान समय में 13-06-2007 से जातक की शुक्र की महादशा है, इस समय शुक्र की महादशा में राहु की अंतरदशा 13-08-2017 तक रहेगी।

आगे 13 अगस्त 2017 से 13-04-2020 तक गुरू की अंतरदशा होगी, इस अवधि में नैसर्गिक शुभ ग्रह गुरू के शुभ प्रभाव से उपरोक्त अवधि में जातक के लिये शुभ की आशा की जा सकती है। परंतु इस अवधि में भी विवाह संभव होगा या नहीं? पूरी तरह मैं आशा नहीं कर सकता।

गुरू ही एक ग्रह है, जो इस जन्म कुण्डली के अशुभ ग्रहों को अपने शुभ प्रभाव से अनुकूल कर सकता है। परंतु कुण्डली के अधिकांश ग्रह विवाह प्रतिबंधक ग्रहों अथवा योगों (vivah pratibandak yog in kundli) को ही बलवान सूचित कर रहे हैं।

नरेंद्र मोदी की कुण्डली में विदेश यात्रायें Modi Kundli & Travelling

Modi Kundli

मित्रों यूं तो सभी प्रधान मंत्रीयों की विदेश यात्रायें होती ही रहती हैं, क्योंकि राजनेता राजनैतिक विदेश यात्रायें करते रहते हैं, अर्थात् विदेश यात्रायें राजनेताओं की कुण्डली में होती ही हैं, परंतु प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) की कुण्डली( modi kundli) में कुछ अधिक ही विदेश यात्राओं के योग हैं। इससे पूर्व जो 18 प्रधानमंत्री हुये हैं, उनमें से अधिकांश ने भी अपने कार्यकाल में राजनैतिक कारणों से विदेश यात्रायें की होंगी। परंतु वर्तमान प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के कारण कुण्डली के कुछ ऐसे ग्रह हैं जो सामान्य से अधिक विदेश यात्रायें करवाने वाला योग बनाते हैं? इस ज्योतिषीय लेख में मैं श्री नरेन्द्र मोदी जी की जन्म कुण्डली (modi kundli) के आधार पर राजनैतिक विदेश यात्राओं का विशलेषण कर रहा हूँ। किन ज्योतिषीय कारणों से वर्तमान प्रधानमंत्री अनेक देशों की यात्रायें करते हैं?

श्री नरेन्द्र मोदी की जन्म तिथि 17 सितम्बर 1950 है, जन्म समय 11 बजे प्रातः तथा जन्म स्थान मेहसाना (गुजरात) है।

श्री नरेन्द्र मोदी की लग्न कुण्डली व नवांश कुण्डली
Narendra Modi Kundli ( Lagn & Navansha)
Modi Kundli

 

यह कुण्डली वृश्चिक लग्न की कुण्डली(modi kundli) है। इस कुण्डली के प्रथम स्थान में चन्द्रमा और मंगल स्थित हैं। चतुर्थ में गुरू, पंचम में राहु की स्थिति है, शनि और शुक्र दशम स्थान में तथा सूर्य, बुध व केतु एकादश स्थान में स्थित हैं।

किसी भी कुण्डली में विदेश यात्राओं का विचार द्वादश स्थान से किया जाता है। विदेश का कारक ग्रह शनि है। आधुनिक आर्थिक सम्पन्नता का कारक ग्रह शुक्र तथा राजनीति का ग्रह सूर्य है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की कुण्डली में विदेश का स्थान (द्वादश) तथा व्यापार स्थान (सप्तम) का स्वामी तथा आधुनिक आर्थिक सम्पन्नता का कारक ग्रह शुक्र विदेश के कारक ग्रह शनि के साथ दशम (कर्म स्थान) में योग (सम्बंध) बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त दशम (कर्म) तथा एकादश (आय) स्थान के स्वामी एकादश स्थान में योग सम्बंध बना रहे हैं।

प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की कुण्डली में अनेक विशेषतायें तो हैं ही, एक यह विशेषता भी दिखाई देती है कि, यह देश के लिये विदेशों से आधुनिक आर्थिक सम्पन्नता के लिये व्यापारिक रिश्ते बखूबी मजबूत बना रहे हैं।

इनकी कुण्डली के ग्यारहवें स्थान का स्वामी ग्रह बुध एक व्यापारी ग्रह है, जो राजनीति के कारक ग्रह सूर्य के साथ युति सम्बंध बना रहा है, यह एक सुन्दर व मजबूत योग है, तथा इसका प्रभाव वर्तमान समय में दिखाई भी दे रहा है। यह व्यापारिक सम्बंध चन्द्रमा (भाग्येश) की महादशा में शनि की अंतरदशा (फरवरी 2016 से सितम्बर 2016 तक) और मजबूत होंगे। सितम्बर 2016 से फरवरी 2019 के मध्य चन्द्रमा में बुध का अंतर होगा, इस अवधि में यह रिश्ते चौगुना मजबूती के साथ आगे बढ़ेंगे।

परंतु ध्यान रखना होगा कि इस के बाद फरवरी 2019 से सितम्बर 2019 के मध्य चन्द्रमा की महादशा में केतु का अंतर होगा। इस समय दशमेश सूर्य तथा एकादशेश बुध के साथ में केतु अतिचतुर (कैम्युनिस्ट) ग्रह भी अपनी उपस्थिति दर्शा रहा है। यह ग्रह कहीं कोई बना-बनाया खेल न बिगाड़ दे। इस अवधि में ऐसी विचारधारा व ऐसे देश से सावधान रहने की आवश्यकता होगी।

इस समय के उपरांत सितम्बर 2019 से मई 2021 के मध्य जब चन्द्रमा में शुक्र का अंतर तथा मई 2021 से नवम्बर 2021 तक चन्द्रमा में सूर्य का अंतर रहेगा, इस समय श्री नरेन्द्र मोदी(Narendra Modi) देश को आगे ले जाने के लिये सैकड़ों गुना आर्थिक समृद्धि का सपना पूरा कर सकते हैं।

मेरी राय में 2019 के लोकसभा चुनाव सितम्बर 2019 से पहले नहीं करवाने चाहियें। इस समय में भी केतु (कैम्युनिस्ट) ग्रह अपनी उपस्थिति दिखा रहा है, जिससे सावधान रहना होगा।